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RSS अनजान राहें [Anjaan Rahein]

  • रिवायत May 1, 2018
    दूर-जाने की रिवायत1भी अब निभानी होगी, एक-अर्सा जो हो गया है सबको जानते हुए। मोहब्बत लत-सी हो जाये तो फ़िर टूटता रहा है दिल अपना, सो ये मालूम था के हम मिले ही हैं बिछड़ जाने के लिए॥ फ़िर किसी नुक्कड़-गली में मिल जाएँ कभी, ग़र्क कर दें गीले-शिक़वे जो कह ना पाए कभी। फ़िक्र […]
    Kunal Samdarshi
  • ईबादत May 14, 2017
    फ़ासले चाहें हों दरमियान जितने, मेरे हर सज़दे में अब तेरी ही ईबादत होगी। सज़्र रातों को तेरे ख़्वाबों में, और सहरा1 में तेरी यादों में। ये इंतज़ार कि आदत भी क्या मोहब्बत होगी॥ फ़ासले चाहें हों दरमियान जितने, मेरे हर सज़दे में अब तेरी ही ईबादत होगी। तेरे चेहरे कि चमक़, जैसे चँदा-ओ-सितारा-ए-फ़लक़2। ये […]
    Kunal Samdarshi
  • याद February 27, 2016
    हमारी भी कट रही है ज़िंदगी 'निश्छल', याद कर याद कुछ रखी है जो सिरहाने !!! hamari bhi kat rahi hai zindagi 'Nishchhal' yaad kar yaad kuchh rakhi hai jo sirhane!!! #yaad #Nishchhal #याद #निश्छल
    Kunal Samdarshi
  • घर February 15, 2016
    बन जाते होंगे मकान हफ्तों-महीनों में, इक उम्र निकल जाती है 'घर' बनाते-बनाते। ban jate honge makaan hafton-mahino mein, ek umra nikal jati hai 'ghar' banate-banate. #20yrs #ghar #Nishchhal #निश्छल #घर #बीस_साल_बाद
    Kunal Samdarshi
  • आभार October 1, 2015
    जब तल़क साँसें रहें और ये साल रहे, मेरी दुआओं में आप सब की खुशी का भी ख़याल रहे । मिल जाउँ हवाओं में ऐसे साख-ए-संदल1 से जब नवाजा जाए, किसी शख्स को 'निश्छल' के ना होने का कोई मलाल रहे ॥ 1.संदल = चंदन ---------------------------------- Jab talak sansein rahein aur ye saal rahe, meri […]
    Kunal Samdarshi
  • उनीन्दी आँखें June 30, 2015
    अक्सर उसको मैंने देखा आँखे मिचते हुए, शायद खुली आँखों से ढ़ेरों सपने देख लिए थे! शायद दो बूँद खुशी कि अटक गई थी कहीं, या धूआँ दीये का, "काजल" बन के पसरा था वहीं! शायद आँखें चुँधिया गई थी किसी उम्मीद से, या चूल्हे कि आग दमक कर बिखर गई थी वहीं! शायद वक्त […]
    Kunal Samdarshi
  • तहजी़ब May 18, 2015
    सुना है तहजी़ब का तराजू बहुत सस्ता बिका है अहले वतन में। सरेआम उछाल देते हैं इज्जत वो जिन्होनें जहालत कर रखी है॥ #Prestitutes #Intolrance #BreakingNewsNonSense
    Kunal Samdarshi
  • रिश्ते May 18, 2015
    उम्र तन्हा हीं क्यों नहीं गुजर जाती 'निश्छल' कम-से-कम रिश्तों कि फजीहत तो नहीं होती! #BondOfFamily #BondOfLove
    Kunal Samdarshi
  • कमाई May 17, 2015
    इश्क और मुश्क छुपाए छूपता नहीं गोया, ग़र हमनें कमाया होता तो तुमको पता नहीं होता? नींद और चैन नहीं आते राह-ए-इश्क में 'निश्छल', ग़र हमनें गँवाया होता तो तुमको पता नहीं होता?
    Kunal Samdarshi
  • उलझे सपने May 16, 2015
    यूँ तो मेरे ख्वाबगाह में रक्खे हैं कई उलझे हुए सपने चाँद आता है पूनम कि रात में, कोई उनमें से सुलझ जाता है। फिर शुरू होती है अमावस से लुका-छीपी और हर रात कुछ नया फिर उलझ जाता है॥ यूँ सुलझने-उलझने में जिन्दगी इस तरह बीती है कि अपने हालात पे भी तरस आता […]
    Kunal Samdarshi